Saturday, 11 January 2025

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को मान्यता देने के लिए डॉ. हार्डिया ने प्रधानमंत्री को लिखा खुला खत


प्रति,

श्री नरेंद्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार,
नई दिल्ली

विषय: इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को औपचारिक रूप से मान्यता देने की अपील एवं विश्व इलेक्ट्रो-होम्योपैथी दिवस के संदर्भ में अनुरोध

मान्यवर,

सादर प्रणाम। मुझे आशा है कि आप स्वस्थ और प्रसन्नचित्त होंगे। मैं डॉ. अजय हार्डिया, एक चिकित्सक, इस पत्र के माध्यम से आपके समक्ष एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाना चाहता हूँ, जो भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है। आज, 11 जनवरी को हम विश्व इलेक्ट्रो-होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाते हैं, और इस अवसर पर मैं आपसे यह निवेदन करता हूँ कि आप इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को औपचारिक रूप से मान्यता देने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी का अविष्कार 1865 में इटली के चिकित्सक डॉ. काउंट सीजर मैटी ने किया था। यह चिकित्सा पद्धति शरीर के ऊर्जा संतुलन और रक्त एवं लसिका (lymph) के चैतन्य पदार्थों पर आधारित है। इलेक्ट्रो-होम्योपैथी रोग के कारणों को नष्ट करने पर ध्यान केंद्रित करती है, न कि केवल लक्षणों के इलाज पर। यह पद्धति विशेष रूप से असाध्य बीमारियों जैसे कैंसर और अन्य दीर्घकालिक रोगों के इलाज में प्रभावी साबित हुई है।

आज हम जिस दिन को विश्व इलेक्ट्रो-होम्योपैथी दिवस के रूप में मना रहे हैं, वह हमें इस महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धति के लाभ और योगदान को समझने का एक अवसर प्रदान करता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य विश्वभर में इलेक्ट्रो-होम्योपैथी के प्रति जागरूकता फैलाना और इसे चिकित्सा प्रणाली का एक मान्यता प्राप्त हिस्सा बनाने का प्रयास करना है।

भारत में, हालांकि इलेक्ट्रो-होम्योपैथी ने कई रोगियों को लाभ पहुंचाया है और इसके प्रभावी परिणाम सामने आए हैं, यह अभी तक हमारे देश की औपचारिक चिकित्सा प्रणाली में शामिल नहीं हो पाई है। मुझे विश्वास है कि अगर इसे मान्यता दी जाती है, तो यह भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है और देश के लाखों लोगों के स्वास्थ्य में सुधार ला सकती है।

इसलिए, मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप इस पद्धति को औपचारिक रूप से मान्यता देने की दिशा में विचार करें, ताकि यह चिकित्सा पद्धति देशभर में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके और भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिले। मुझे पूरा यकीन है कि आपके नेतृत्व में हम इसे एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य विकल्प के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया का मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा और आशा करता हूँ कि आप इस दिशा में शीघ्र कदम उठाएंगे।

सादर,
डॉ. अजय हार्डिया
निदेशक, देवी अहिल्या हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 


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