Saturday, 11 January 2025

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को मान्यता देने के लिए डॉ. हार्डिया ने प्रधानमंत्री को लिखा खुला खत


प्रति,

श्री नरेंद्र मोदी जी,
माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार,
नई दिल्ली

विषय: इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को औपचारिक रूप से मान्यता देने की अपील एवं विश्व इलेक्ट्रो-होम्योपैथी दिवस के संदर्भ में अनुरोध

मान्यवर,

सादर प्रणाम। मुझे आशा है कि आप स्वस्थ और प्रसन्नचित्त होंगे। मैं डॉ. अजय हार्डिया, एक चिकित्सक, इस पत्र के माध्यम से आपके समक्ष एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाना चाहता हूँ, जो भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली के लिए अत्यंत लाभकारी हो सकता है। आज, 11 जनवरी को हम विश्व इलेक्ट्रो-होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाते हैं, और इस अवसर पर मैं आपसे यह निवेदन करता हूँ कि आप इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को औपचारिक रूप से मान्यता देने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी का अविष्कार 1865 में इटली के चिकित्सक डॉ. काउंट सीजर मैटी ने किया था। यह चिकित्सा पद्धति शरीर के ऊर्जा संतुलन और रक्त एवं लसिका (lymph) के चैतन्य पदार्थों पर आधारित है। इलेक्ट्रो-होम्योपैथी रोग के कारणों को नष्ट करने पर ध्यान केंद्रित करती है, न कि केवल लक्षणों के इलाज पर। यह पद्धति विशेष रूप से असाध्य बीमारियों जैसे कैंसर और अन्य दीर्घकालिक रोगों के इलाज में प्रभावी साबित हुई है।

आज हम जिस दिन को विश्व इलेक्ट्रो-होम्योपैथी दिवस के रूप में मना रहे हैं, वह हमें इस महत्वपूर्ण चिकित्सा पद्धति के लाभ और योगदान को समझने का एक अवसर प्रदान करता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य विश्वभर में इलेक्ट्रो-होम्योपैथी के प्रति जागरूकता फैलाना और इसे चिकित्सा प्रणाली का एक मान्यता प्राप्त हिस्सा बनाने का प्रयास करना है।

भारत में, हालांकि इलेक्ट्रो-होम्योपैथी ने कई रोगियों को लाभ पहुंचाया है और इसके प्रभावी परिणाम सामने आए हैं, यह अभी तक हमारे देश की औपचारिक चिकित्सा प्रणाली में शामिल नहीं हो पाई है। मुझे विश्वास है कि अगर इसे मान्यता दी जाती है, तो यह भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली में एक महत्वपूर्ण योगदान दे सकती है और देश के लाखों लोगों के स्वास्थ्य में सुधार ला सकती है।

इसलिए, मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि आप इस पद्धति को औपचारिक रूप से मान्यता देने की दिशा में विचार करें, ताकि यह चिकित्सा पद्धति देशभर में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच सके और भारत में चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिले। मुझे पूरा यकीन है कि आपके नेतृत्व में हम इसे एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य विकल्प के रूप में स्थापित कर सकते हैं।

आपकी सकारात्मक प्रतिक्रिया का मैं बेसब्री से इंतजार करूंगा और आशा करता हूँ कि आप इस दिशा में शीघ्र कदम उठाएंगे।

सादर,
डॉ. अजय हार्डिया
निदेशक, देवी अहिल्या हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर 


डॉ. काउंट सीजर मैटी: कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का इलाज करने वाले चिकित्सा विज्ञान के नायक

आज से लगभग दो सदी पहले, जब चिकित्सा के पारंपरिक सिद्धांत और उपचार विधियों में संशय और संदेह का दौर था, तब एक ऐसे वैज्ञानिक और चिकित्सक का उदय हुआ जिन्होंने चिकित्सा के पूरे परिप्रेक्ष्य को बदल दिया। हम बात कर रहे हैं डॉ. काउंट सीजर मैटी की, जिनके द्वारा स्थापित इलेक्ट्रो-होम्योपैथी ने समग्र चिकित्सा और वैकल्पिक उपचार विधियों में एक नई दिशा दी।

डॉ. काउंट सीजर मैटी का जन्म 11 जनवरी 1809 को इटली के बोलोग्ना शहर में हुआ था, और उनके जीवन का एक प्रमुख मोड़ उनकी माँ के स्तन कैंसर से निधन के बाद आया। इस दुखद घटना ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियाँ गंभीर बीमारियों को ठीक करने में असफल क्यों हो रही हैं। उनका विश्वास था कि शरीर में सिर्फ लक्षणों का इलाज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि रोग के कारणों की जड़ तक जाना चाहिए। इस सोच ने उन्हें एक नई चिकित्सा पद्धति विकसित करने की प्रेरणा दी, जिसे बाद में इलेक्ट्रो-होम्योपैथी के नाम से जाना गया।

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी: एक नई चिकित्सा पद्धति

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी एक ऐसा चिकित्सा सिद्धांत है जो शरीर की ऊर्जा पर आधारित है। डॉ. मैटी ने अपने उपचार में इलेक्ट्रो और होम्योपैथी के सिद्धांतों को मिलाकर एक अनूठी प्रणाली बनाई। होम्योपैथी का उद्देश्य रोग के लक्षणों का इलाज करना होता है, जबकि इलेक्ट्रो-होम्योपैथी में रोग के कारण को दूर करने पर जोर दिया जाता है।

इस पद्धति का मुख्य सिद्धांत यह है कि शरीर में दो महत्वपूर्ण चैतन्य पदार्थ— रक्त और लसिका— हैं, जो शरीर के सभी अंगों को पोषित करते हैं। जब इन दोनों पदार्थों में असंतुलन होता है, तो रोग उत्पन्न होते हैं। डॉ. मैटी ने ऐसे औषधियों का निर्माण किया जो इन दोनों चैतन्य पदार्थों को शुद्ध करके शरीर को रोग मुक्त करती हैं। इन औषधियों का असर विद्युत ऊर्जा की तरह होता है, जो सीधे कोशिकाओं और अंगों तक पहुँचकर शरीर की कार्यप्रणाली को सुधारती है।

कैंसर के इलाज में इलेक्ट्रो-होम्योपैथी की भूमिका

एक महत्वपूर्ण पहलू जिस पर डॉ. काउंट सीजर मैटी ने विशेष ध्यान दिया, वह था कैंसर जैसे असाध्य रोगों का इलाज। कैंसर के इलाज में इलेक्ट्रो-होम्योपैथी ने क्रांतिकारी परिवर्तन लाया। इस पद्धति की दवाएँ शरीर के दूषित चैतन्य पदार्थों को शुद्ध करती हैं और कैंसर की कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करती हैं। डॉ. मैटी का मानना था कि कैंसर जैसे गंभीर रोगों का इलाज केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं हो सकता, बल्कि शरीर के आंतरिक संतुलन को ठीक करने की आवश्यकता होती है, जो उनकी पद्धति द्वारा संभव था।

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी से कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को रोकने, सूजन और दर्द को कम करने में मदद मिलती है। यह पद्धति कैंसर के इलाज में एक अतिरिक्त विकल्प के रूप में उभर कर सामने आई और समय के साथ इसकी प्रभावशीलता सिद्ध हुई।

डॉ. काउंट सीजर मैटी का वैश्विक योगदान

डॉ. मैटी का योगदान सिर्फ इटली तक सीमित नहीं था। उन्होंने इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को एक वैश्विक चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया। 1881 में, जब उन्हें औपचारिक चिकित्सा समुदाय द्वारा विरोध का सामना करना पड़ा, तब भी उन्होंने अपनी दवाओं का बड़े पैमाने पर उत्पादन करना शुरू किया और इन्हें विदेशों में निर्यात किया। उनके द्वारा लिखी गई किताबें और चिकित्सा सिद्धांतों का प्रचार-प्रसार दुनिया भर में हुआ। डॉ. मैटी का विश्वास था कि चिकित्सा का उद्देश्य केवल रोग का इलाज नहीं, बल्कि हर व्यक्ति को दर्द और कष्ट से मुक्ति दिलाना होना चाहिए।

इस पद्धति की लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि 1873 में लंदन के सेंट जेवियर्स कैंसर अस्पताल में इसका उपयोग शुरू हुआ। साथ ही, उनके इलाज से प्रभावित होकर कई प्रमुख शख्सियतों ने इलेक्ट्रो-होम्योपैथी से इलाज कराया, जिनमें बेवेरन के राजा लुडविग और रूस के सम्राट अलेक्जेंडर भी शामिल थे।

डॉ. काउंट सीजर मैटी ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ा। उनका जीवन और कार्य यह साबित करता है कि अगर हमें कुछ नया करने की इच्छा हो, तो हमें अपने विश्वासों के साथ खड़ा रहकर अपनी खोजों और सिद्धांतों का पालन करना चाहिए। उनकी इलेक्ट्रो-होम्योपैथी पद्धति आज भी चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है और भविष्य में इसके उपयोग और विकास की संभावनाएं अनंत हैं।

इस प्रकार, हम डॉ. काउंट सीजर मैटी के योगदान को न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में, बल्कि मानवता की सेवा में उनके अद्वितीय योगदान के रूप में भी याद करते हैं। उनके द्वारा स्थापित इलेक्ट्रो-होम्योपैथी पद्धति आज भी लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही है।

काउंट सीजर मैटी से हम जो 10 महत्वपूर्ण बातें सीख सकते हैं:

  1. नवाचार को अपनाएं: काउंट मैटी के इलेक्ट्रो-होम्योपैथी के विचार ने चिकित्सा के पारंपरिक ढांचे को चुनौती दी। उन्होंने दिखाया कि नवाचार का मूल्य यह है कि हम पुराने विचारों से बाहर सोचें और नई दिशा में विचार करें।

  2. कठिनाइयों में धैर्य रखें: मैटी को चिकित्सा समुदाय से भारी विरोध का सामना करना पड़ा, फिर भी उन्होंने अपनी शोध जारी रखी। यह हमें सिखाता है कि वास्तविक उन्नति अक्सर संदेह और आलोचना का सामना करने के बाद ही होती है।

  3. समग्र चिकित्सा: काउंट मैटी का इलाज केवल लक्षणों का उपचार नहीं था, बल्कि उन्होंने समग्र रूप से शरीर को संतुलित करने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने हमें यह सिखाया कि स्वस्थ शरीर के लिए ऊर्जा संतुलन जरूरी है।

  4. प्रकृति का सम्मान करें: मैटी ने हमेशा प्राकृतिक उपचार विधियों का समर्थन किया, यह याद दिलाते हुए कि जड़ी-बूटियाँ और पौधे हमारे शरीर के उपचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  5. समाज सेवा में योगदान: मैटी ने गरीबों का मुफ्त इलाज किया, यह दिखाते हुए कि चिकित्सा केवल एक व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह एक सेवा है जो समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचनी चाहिए।

  6. नवाचार में जोखिम लें: मैटी ने इलेक्ट्रो-होम्योपैथी का विकास जोखिम लेकर किया। उन्होंने दिखाया कि वास्तविक परिवर्तन और विकास में जोखिम लेना जरूरी होता है।

  7. स्वयं पर विश्वास रखें: मैटी ने राजनीति से हटकर चिकित्सा के क्षेत्र में अपना ध्यान केंद्रित किया, यह साबित करते हुए कि हमें अपने सच्चे उद्देश्य का पालन करना चाहिए।

  8. सीखने का उत्साह: मैटी ने अपने जीवन के शुरुआती 40 वर्षों तक राजनीति में भाग लिया, फिर चिकित्सा का अध्ययन शुरू किया। यह दर्शाता है कि कभी भी सीखने और अपने ज्ञान को बढ़ाने का समय नहीं बीतता।

  9. उदारता और दया: मैटी का जीवन यह दर्शाता है कि हमें अपनी सफलता को दूसरों के भले के लिए उपयोग करना चाहिए। उन्होंने गरीबों के लिए अपनी चिकित्सा सेवा को नि:शुल्क किया, जो एक महान उदाहरण है।

  10. विरासत और देखभाल: मैटी ने अपनी चिकित्सा प्रणाली और उपचार पद्धतियों के माध्यम से एक महान विरासत छोड़ी। उनकी पूरी जीवन यात्रा हमें सिखाती है कि हम जो काम करते हैं, उसकी देखभाल और पोषण करना आवश्यक है ताकि वह आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे।       

      -  मनीषा शर्मा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल इंदौर 


Friday, 10 January 2025

विश्व इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस विशेष : काउंट सीज़र मैटी का जीवन और उनके योगदान पर आलेख


आज, 11 जनवरी को हम एक महान चिकित्सक और वैज्ञानिक, काउंट सीज़र मैटी की जयंती मना रहे हैं, जिन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई दिशा और दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उनका जीवन एक प्रेरणा है, जो हमें यह सिखाता है कि कठिनाइयाँ चाहे जैसी भी हों, अगर हमारे पास सही दिशा और समर्पण हो, तो हम अपनी मंजिल तक पहुँच सकते हैं। 

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

काउंट सीज़र मैटी का जन्म 11 जनवरी 1809 को इटली के बोलोग्ना शहर में एक संपन्न परिवार में हुआ था। उनके परिवार का सामाजिक और बौद्धिक स्तर बहुत ऊँचा था, और वे महान विचारकों और नेताओं के संपर्क में रहे। इस वातावरण में उनका पालन-पोषण हुआ, जो उनकी सोच और दृष्टिकोण को प्रभावित करने वाला था। उनका जीवन राजनीति और समाज सेवा में भी बहुत सक्रिय रहा। 

1837 में उन्होंने कासा दी रिस्पार्मियो, एक बैंक की स्थापना में योगदान दिया और इसके बाद 1847 में उन्हें पोफ पियस IX से काउंट की उपाधि प्राप्त हुई, जब उन्होंने पापल स्टेट्स को ऑस्ट्रियाई आक्रमण से बचाने के लिए कोमाच्चियो में भूमि दान की थी। 

चिकित्सा क्षेत्र में कदम

राजनीतिक और सामाजिक कार्यों में अपने योगदान के बाद, 1850 में उन्होंने अपनी माँ की मृत्यु के बाद चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी पूरी ज़िंदगी समर्पित करने का निर्णय लिया। यह समय उनके जीवन का मोड़ था। उन्होंने साविग्नानो में एक प्राचीन किले के खंडहर पर "रोकेट्टा" नामक महल का निर्माण किया, जहाँ वे 1859 से स्थायी रूप से रहने लगे। इस महल में रहते हुए उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में नए शोध किए और एक नई चिकित्सा पद्धति विकसित की। 

इलेक्ट्रो होम्योपैथी की खोज

डॉ. सीज़र मैटी ने होम्योपैथी के सिद्धांतों को परे रखते हुए इलेक्ट्रो होम्योपैथी नामक एक नई चिकित्सा पद्धति की खोज किया। यह पद्धति शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के सुधार के लिए शरीर के ऊर्जा संतुलन को ठीक करने का प्रयास करती है। 1881 में, उन्होंने इटली के साथ अन्य देशों में भी फैल गई। उनके इस अनुसंधान ने चिकित्सा क्षेत्र में एक नई क्रांति का आगाज़ किया। 

वैश्विक स्तर पर इलेक्ट्रो होम्योपैथी का प्रचार

1884 तक, डॉ. मैटी की इलेक्ट्रो होम्योपैथी प्रणाली पूरे विश्व में फैल चुकी थी। उन्होंने बोलोग्ना में एक केंद्रीय गोदाम स्थापित किया और इसके बाद बेल्जियम, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन जैसे देशों में इस पद्धति का प्रचार किया। इस प्रणाली ने लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाया और आज भी यह पद्धति चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती है। 

जीवन के अंतिम वर्ष और निधन

डॉ. सीज़र मैटी का जीवन कठिनाइयों और संघर्षों से भरा हुआ था। पारिवारिक विवाद और आर्थिक संकट उनके जीवन के हिस्से रहे। उनके जीवन में एक दुखद मोड़ आया, जब उन्होंने अपने पोते को वसीयत से बाहर किया। फिर भी, उन्होंने अपने सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया और इलेक्ट्रो होम्योपैथी की पद्धति को छोड़ने का विचार कभी नहीं किया। 3 अप्रैल 1896 को 87 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया, लेकिन उनके सिद्धांत और पद्धतियाँ आज भी जीवित हैं। 

उनकी पुस्तकें और योगदान

डॉ. सीज़र मैटी ने चिकित्सा पद्धतियों और उनके सिद्धांतों पर कई पुस्तकें लिखी। इनमें प्रमुख पुस्तकों में "मैटी के उपचार का एक छोटा इतिहास", "इलेक्ट्रो होम्योपैथी: एक नई विज्ञान जो रक्त को ठीक करता है और शरीर को ठीक करता है" और "इलेक्ट्रो होम्योपैथी का नया वेड-मेकम" शामिल हैं। उनकी इन पुस्तकों ने लाखों लोगों को उनके उपचार पद्धतियों के बारे में बताया और चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान को और भी सशक्त किया। 

काउंट सीज़र मैटी का जीवन हमें यह सिखाता है कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में नई सोच और नवाचार कितना महत्वपूर्ण है। उनके द्वारा स्थापित इलेक्ट्रो होम्योपैथी प्रणाली ने न केवल शारीरिक बीमारियों का इलाज किया, बल्कि मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य में भी सुधार लाया। आज हम उनके योगदान को याद करते हुए यह प्रण लेते हैं कि उनके सिद्धांतों का प्रचार करें और चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई क्रांति का हिस्सा बनें। 

डॉ. सीज़र मैटी की जयंती पर हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके योगदान को आगे बढ़ाने के लिए संकल्पित होते हैं। उनके सिद्धांत और पद्धतियाँ हमेशा चिकित्सा जगत में प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी। 

विश्व इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस: डॉ. काउंट मैटी के योगदान को याद करते हुए डॉ. अजय हार्डिया का संदेश

प्रिय साथियों,  

आज हम एक ऐसे महान व्यक्ति, डॉ. काउंट सीज़र मैटी की जयंती मना रहे हैं, जिन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अद्वितीय सोच और शोध से एक नई दिशा दी। डॉ. मैटी का जीवन न केवल एक महान चिकित्सक का जीवन था, बल्कि यह एक प्रेरणा का स्रोत भी था। उनका संघर्ष, समर्पण और उनका अद्वितीय दृष्टिकोण हमेशा हमें प्रेरित करता रहेगा।  

डॉ. काउंट सीज़र मैटी का जन्म 11 जनवरी 1809 को बोलोग्ना में हुआ था, और उनका पालन-पोषण उन महान विचारकों के साथ हुआ, जिन्होंने उन्हें चिकित्सा की दिशा में एक नई सोच देने में मदद की। अपने जीवन में कई उतार-चढ़ावों के बावजूद, डॉ. मैटी ने कभी हार नहीं मानी। वे 1837 में बोलोग्ना के कासा दी रिस्पार्मियो के संस्थापक बने, और 1847 में पोप पियस IX से काउंट की उपाधि प्राप्त की। 

लेकिन राजनीति और समाज सेवा से हटकर, उन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में कदम रखा। 1850 में अपनी माँ की मृत्यु के बाद, डॉ. मैटी ने अपनी पूरी ज़िंदगी चिकित्सा की खोज में समर्पित कर दी। उन्होंने इलेक्ट्रो होम्योपैथी नामक एक नई चिकित्सा पद्धति को जन्म दिया, जो न केवल शारीरिक रोगों का इलाज करती है, बल्कि मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य को भी प्राथमिकता देती है। उन्होंने इसके द्वारा शरीर के ऊर्जा संतुलन को ठीक करने की कोशिश की, जो आज भी चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण और प्रभावी पद्धति के रूप में मानी जाती है। 

1881 में, उन्होंने इलेक्ट्रो होम्योपैथी उपचार की वैश्विक स्तर पर शुरुआत की, जो तब से अब तक पूरी दुनिया में फैल चुका है। उनकी पद्धतियाँ और शोध आज भी लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बना रही हैं। उनके द्वारा स्थापित चिकित्सा प्रणाली ने एक नई चिकित्सा क्रांति की नींव रखी और पूरी दुनिया में 107 स्थानों पर इसका प्रसार हुआ।  

हालांकि डॉ. मैटी के जीवन में कई कठिनाइयाँ आईं, जैसे आर्थिक संकट और पारिवारिक विवाद, लेकिन उन्होंने कभी अपनी चिकित्सा पद्धति को छोड़ने का विचार नहीं किया। उनके संघर्ष और समर्पण ने उन्हें एक अद्वितीय स्थान दिलाया। उनकी पद्धतियाँ आज भी विश्वभर में लाखों लोगों के इलाज में सहायक सिद्ध हो रही हैं।  

आज हम उनके योगदान को याद करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठा सकते हैं। मैं आप सभी से अपील करता हूँ कि हम 11 जनवरी को विश्व इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस के रूप में मनाएं, ताकि हम डॉ. सीज़र मैटी की दी गई चिकित्सा पद्धतियों को और अधिक लोगों तक पहुंचा सकें। यह दिन डॉ. मैटी की याद के साथ साथ चिकित्सा जगत के लिए एक प्रेरणा और एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक बन सकता है।

हमारे समाज में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं, और इस समय इलेक्ट्रो होम्योपैथी जैसे वैकल्पिक उपचार पद्धतियाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। डॉ. मैटी की पद्धति ने यह सिद्ध कर दिया है कि हम केवल दवाओं पर निर्भर नहीं रह सकते, बल्कि शरीर की ऊर्जा संतुलन को भी ठीक करके हम बीमारियों का इलाज कर सकते हैं।  

आइए, हम इस दिन को एक उत्सव के रूप में मनाएं और डॉ. मैटी के योगदान को पूरी दुनिया में फैलाने का प्रयास करें। यह केवल एक चिकित्सा पद्धति का उत्सव नहीं, बल्कि मानवता की सेवा करने का एक संकल्प भी है। 

हम डॉ. काउंट सीज़र मैटी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं और उनके द्वारा दी गई शिक्षाओं और पद्धतियों को पूरी दुनिया में फैलाने का संकल्प लेते हैं। विश्व इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस का यह दिन न केवल चिकित्सा जगत के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हमें यह याद दिलाता है कि सही सोच, दृढ़ निश्चय और समर्पण से किसी भी चुनौती को पार किया जा सकता है।  

धन्यवाद!

डॉ. अजय हार्डिया, निदेशक,

देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल  

विश्व इलेक्ट्रो होम्योपैथी दिवस पर उपराष्ट्रपति की बातें, जो हमेशा याद रहेंगी

विश्व इलेक्ट्रोपैथी दिवस की सभी को अभिनंदन और बधाई! हम ऐसे कालखंड में हैं कि हमें कुछ बातों की ओर ध्यान रखना पड़ेगा। वह हमारे रीढ़ की हड्डी हैं ‘Spinal Strength of our Great Nation’.  भारत में दुनिया की 1/6th ह्यूमैनिटी रहती है। हमारी जो व्यवस्था है दुनिया में इसका कोई मुकाबला नहीं है। राष्ट्रवाद और भारतीयता को आप सदैव समर्पित रहें, यह मेरी आकांक्षा है और अभिलाषा है।

और इसको भी मैं अक्सर बच्चों से कहता हूं and they appreciate it. It is not an option, it is non negotiable. यही एक रास्ता है हमारे भारत को बहुत महान बनाने का और उसी रास्ते पर भारत निरंतरता से अग्रसर है। 

देशहित को सर्वोपरि रखना हमारा दायित्व है। राष्ट्रधर्म और सांस्कृतिक अस्मिता को कभी आंच ना आये यह हमारा संकल्प और दायित्व होना चाहिए। कुछ भ्रमित लोग ऐसा करते रहते हैं। हम जानते हैं कि वह गलत काम कर रहे हैं। राष्ट्र विरोधी नैरेटिव को चलाते हैं। जानकार आदमी जब ऐसा करता है तो बड़ी पीड़ा होती है। कोई अर्थशास्त्री जिसने 10 साल तक भारत की अर्थव्यवस्था के साथ जुड़ाव रखा वह कहता है विदेश से कि 5% से ज्यादा की बढ़ोतरी नहीं होगी और वह बढ़ोतरी 7.6% है। तो मैं आप सबसे कहूंगा यह समय शांत रहने का नहीं है, यह समय चुप रहने का नहीं है।

If we remains silent when we should be speaking vocaly, then trust me our silence will resonate in our ears for years to come and we will be silenced.

भारतमाता यह स्वीकार नहीं करेगी और मेरा आग्रह रहेगा हर व्यक्ति से कि वह अपने कर्तव्य का निर्वहन वर्तमान स्थिति को देखकर करें जहां भारत का अस्तित्व पूरी दुनिया दूसरे तरीके से मान रही है।

यदि अगर किसी क्षेत्र में सबसे बड़ी छालंग भारत ने लगाई है तो वह स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगाई है। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में स्वास्थ्य मूल केंद्र रहा है, विकास का मूल मंत्र रहा है और यही कारण है कि पहली बार देश में आयुष मंत्रालय बना। इससे पहले नहीं था पहली बार दुनिया का सबसे बड़ा कार्यक्रम - आयुष्मान भारत दुनिया में कहीं ऐसा नहीं है। दुनिया के जो सबसे विकसित देश है वहां भी अफॉर्डेबल मेडिकल केयर नहीं है, जो यहां पर है।

आज के दिन हर आदमी यह सोचता है कि मेरा खानपान अच्छा हो, पेस्टिसाइड से ग्रसित ना हो। मैं स्वस्थ रहूं। पर भारत ने पहल की है इसमें भी और दुनिया को बहुत बड़ा रास्ता दिखाया है। हमारे अथर्ववेद में क्या कुछ नहीं लिखा है स्वास्थ्य के बारे में। दुनिया के वैज्ञानिक हतप्रभ है और नरेंद्र मोदी ने संयुक्त राष्ट्र का उपयोग करके वहां योग के बारे में बताया। दुनिया ने स्वीकार किया कम से कम समय में दुनिया के ज्यादा से ज्यादा देशों ने उसको अपनाया।

अभी 21 जून को  दुनिया के हर कोने में योग दिवस मनाया जाता है। योग दुनिया को भारत की देन है और गत योग दिवस पर जबलपुर, मैं उसमें था और हमारे प्रधानमंत्री जी ने विदेश में संयुक्त राष्ट्र प्रांगण में दुनिया के देशों के प्रतिनिधियों के सामने  योग किया। योग, योग दिवस तक सीमित नहीं है। योग हर दिन का है।

अब देखिए मोटे अनाज की बात दुनिया में बहुत बड़ा चलन हो गया श्री अन्न का। प्रधानमंत्री जी ने दूरदर्शिता दिखाते हुए संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से International Millet Year declare कराया। कितना बड़ा बदलाव आया है। किसान की हालत तो उसमें सुधरेगी ही बहुत सी व्यवसायिक Opportunities भी वहां से निकलेगी पर स्वास्थ्य की दृष्टि से यह बहुत जबरदस्त है।

Electropathy के बारे में  मैंने कहा, नाम के अलावा सब ठीक है। नाम के अंदर लगता है कि कोई करंट लगेगा पर ऐसा कुछ नहीं है। There can be nothing more natural, organic then electropathy.

आज के दिन मैं यहां से आह्वान करना चाहूंगा,

किसान बंधुओं को खासकर कि वह अपने बच्चों को नौकरी में भेजने के लिए लालायित हैं। वह इस और ध्यान नहीं देने वाले हैं कि सबसे बड़ा व्यवसाय कृषि उत्पाद का है। दूध का जितना वैल्यू एडिशन हो सकता है सरकार की जो नीतियां हैं आज के दिन उनका फायदा उठाना चाहिए। मैं यह सब इसलिए कह रहा हूं आज के दिन  क्योंकि यह सब बातें स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है।

हमारी लाइफस्टाइल ऐसी हो गई है कि हम लाइफस्टाइल की वजह से बीमारी को आमंत्रण दे रहे हैं। हमारी इम्युनिटी इतनी कमजोर हो गई है कि जब कोविड की महामारी आई तो राजस्थान के कई स्थानों से पैकेट बुने गए, कोलकाता में भेजे गए। कोलकाता पुलिस ने उनको ग्रहण किया और वह सबसे ज्यादा कारगर साबित हुए। राज भवन कोलकाता में लघु उद्योग चालू कर दिया हमने। 600 से ज्यादा कर्मचारी थे, हर तीसरे दिन हम काढ़ा देते थे। एक भी कोविड की चपेट में नहीं आया।

कहने का मतलब यह है की चमक है, दमक है आकर्षण है, आवश्यकता है बड़े अस्पताल की, मैं उसके खिलाफ नहीं हूं पर जो हमारी पूंजी है हजारों साल की पूंजी है जो सार्थक है उसको अपनाना चाहिए।

देश के मानुष को बदलना ही राजतंत्र है देश को एक दृष्टि देना यही राजतंत्र है।

शुरू में हम कहीं भी जाते हैं, भारत का जो व्यक्ति है वह थोड़ा हिचकिचाहट में रहता है कि पता नहीं दूसरा कितना प्रतिभाशाली है। मैं भी पेरिस में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन में रहा। We take to system as duck takes to water. बत्तख की तरह हम भी जल्दी ग्रहण कर लेते हैं और यही कारण है आज के दिन की दुनिया में कोई ऐसा बड़ा कॉर्पोरेट नहीं है कोई ऐसी बड़ी संस्था नहीं है जहां भारतीय का योगदान ना हो। हम कहां थे और कहां आ गए हैं।

10 साल पहले दुनिया की पांच अर्थव्यवस्था में जो दुनिया के लिए  चिंता का कारण थी, दुनिया पर बोझ थी, हमारा नाम उनमें शुमार था। और आज इंग्लैंड को पीछे छोड़ते हुए, कनाडा को पीछे छोड़ते हुए, फ्रांस को पीछे छोड़ते हुए हम दुनिया के पांचवी आर्थिक महाशक्ति है। 2027 - 28 तक हम जापान और जर्मनी को भी पीछे छोड़ देंगे।

मेरा यह पीछे छोड़ने वाला मामला मुझे सुधार करना चाइये। हम किसी को पीछे छोड़ते नहीं हैं। हम हमारा मार्ग प्रशस्त करते हैं,और सबको साथ लेते हैं।

 दुनिया के सामने सबसे बड़ा संकट था कोविड। भारत ने अपने लोगों का ध्यान रखते हुए भी 100 से ज्यादा देशों की मदद की। वसुधैव कुटुंबकम हमारे लिए एक एक्सप्रेशन नहीं है यह हमारी सोच है और यही कारण है कि जी-20 में इसको मोटो के रूप में अपनाया गया।

लोग कहते हैं sky is the लिमिट। आज के भारत में sky is not the limit आज के भारत में कोई लिमिट नहीं है।

हमारा शरीर तभी स्वस्थ रहेगा जब शरीर के सब अंग स्वस्थ रहेंगे, दिमाग स्वस्थ नहीं रहता परेशानी है। दिल के साथ परेशानी है, liver के साथ पूरे शरीर का यही हाल है। समाज का भी यही हाल है। समाज भी तभी स्वस्थ रहेगा जब समाज के सभी अंग एक साथ रहेंगे।

हमारी संस्कृति यही कहती है सब मिलकर काम करो एकजुटता से काम करो। बड़ी पीड़ा होती है। कहने को तो कहते हैं 36 कौम है पर कोम ज़यादा हैं। मुझे बड़ी पीड़ा होती है कुछ लोगों की सोच कितनी नीचे है, विकृत है कितनी छोटी है, ऐसी बातें करने लग जाते हैं 35 बनाम एक। इनको इस भाग में बांट दो, उस भागों में बाट दो। हम सब का परम कर्तव्य है कि समाज में जो लोग जहर घोलते हैं, सबसे पहले उनका आचरण अमर्यादित है। दूसरा उनको यह नहीं पता कि जिसको वह शक्ति मानते हैं वह उनकी सबसे बड़ी कमजोरी है। समाज को जोड़ना हमारा कर्तव्य है। समाज को इस तरीके से हम नहीं बांट सकते हैं। राष्ट्रहित सर्वोपरि हित है राजनीति के चश्मे से नहीं देखा जा सकता।

मुझे राम मंदिर के संबंध में निमंत्रण मिला तो मुझे वहां कहना पड़ा सार्वजनिक रूप से कि राम की कल्पना, राम राज्य की कल्पना भारत के संविधान में निहित है। संविधान के निर्माता ने इसे पराकाष्ठ पर रखा है। संविधान में जो बीस से ज्यादा चित्र हैं उनमे मौलिक अधिकारों के ऊपर जो चित्र है उसमें राम, लक्ष्मण, सीता है। यह संविधान में है।

मुझे बहुत पीड़ा होती है जब कोई ... मैं किसी की आलोचना नहीं करता.... अज्ञानी है, वह इतिहास से अनभिज्ञ है जो हलफनामा दे देते हैं कि राम काल्पनिक है। वह वर्तमान में किसी का अनादर नहीं कर रहे हैं वह हमारे संविधान निर्माताओं का अनादर कर रहे हैं जिन्होंने बहुत सोच समझकर विवेकपूर्ण तरीके से उन चित्रों को वहां रखा है।

भारत का जो अमृत काल है वह भारत का गौरव काल है। अमृत काल में इतनी मजबूत नींव रखी जा चुकी है कि 2047 में जब भारत आजादी के 100 साल मनाएगा, भारत विकसित देश ही नहीं होगा दुनिया में सर्वोपरि होगा।

हमारा परम कर्तव्य है कि हम आर्थिक राष्ट्रवाद की सोचें। यह हर एक का है, खास तौर से जो उद्योग में है व्यापार में है इंडस्ट्री ट्रेड एंड बिजनेस वह यह काम कर सकते हैं। हम विदेशों से दिये मंगाएंगे, कैंडल मंगाएंगे, फर्नीचर मंगाएंगे, कर्टन मंगाएंगे, वह चीजे मंगाएंगे जो यहां बनती हैं। हम थोड़े से पैसे के लालच के लिए देश का और देश के नागरिकों को बहुत अहित कर रहे हैं। जब बाहर से वह चीज़ मंगा रहे हैं जो यहां उपलब्ध है तो हम उन लोगों के हाथों से काम छीन रहे हैं जो वह उसे काम में लगे हए हैं। मेरी विनम्र प्रार्थना है हर नागरिक से और खास तौर से इंडस्ट्री ट्रेड एंड बिजनेस के नेताओं को, लीडरशिप को आगे आना चाहिए हम देश में वही आयात करें जो हमारी राष्ट्र के लिए  अति आवश्यक है।

कहते हैं कि मेरे पास पैसा है तो पांच गाड़ियां रखूंगा चाहे जितना पेट्रोल use करूंगा चाहे जितनी बिजली use करूंगा। मतलब I will consume natural resources because i have fiscal capacity because I have power in my पॉकेट. यह आपका अधिकार नहीं है। We are trustees. पानी हो, कोयला हो ऊर्जा हो उसका उपयोग optimal utilization होना चाहिए।

जो लोग समाज को हिस्सों में बांटना चाहते हैं तात्कालिक राजनीतिक फायदे के लिए बांटना चाहते हैं जहर फैलाना चाहते हैं 35 बनाम 1 की बात करते हैं, 20 बनाम 10 की बात करते हैं वह लोग समाज के दुश्मन नहीं वह खुद के दुश्मन भी है। उनका आचरण अमर्यादित नहीं घातक है और आज के दिन उनको ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति या समूह है कितनी भी सिक्रेसी में कोई बात करें वह सड़क पर तुरंत आती है, तीव्र गति से आती है और समाज को एक तरह से बहुत muddy वाटर में डालती है। यह मेरी आपसे कामना है प्रार्थना है कामना है  अनुरोध है कि ऐसे तत्वों को सबक सिखाने की दरकार नहीं है वह अपने हैं उनको जागरूक करने की दरकार है उनको समझाने की दरकार है उनको सही रास्ते पर लाने की दरकार है। और यह काम संस्थागत तरीके से नहीं अपने पड़ोस में होना चाहिए, अपने समाज में होना चाहिए, जिस वर्ग से हम जुड़े हुए हैं वहां होना चाहिए।

मेरा संवाद प्रेमचंद जी बैरवा जी से विचित्र परिस्थिति में हुआ। 23 अप्रैल 2023 को धन्ना जाट भगत की जयंती पर मुझे कैथल में मुख्यमंत्री ने हरयाणा बुलाया। बहुत शानदार कार्यक्रम रहा। उस इलाके में धन्ना जाट की बहुत मान्यता है  और मुझे लगा राजस्थान में इनका जन्म हुआ है वहां का निमंत्रण मुझे मिलने में आपने बहुत सहायता की और 23 सितंबर 2023 का दिन निश्चित किया गया। पर एक संकट आ गया। संकटमोचन भी आप ही बने। संकट यह आ गया की तत्कालीन सरकार ने कहा कि यहां पर हेलीकॉप्टर उतर नहीं पाएगा स्वाभाविक है कि लोग चाहते हैं कि जब अपनों में से जब कोई ऊपर जाता है तब हम उसका स्वागत भी करें और अपेक्षा भी रखते हैं। इन्होंने बहुत बुद्धिमत्ता दिखाई। एक किसान को तैयार किया और किसान ने जिलाधीश को लिखकर दे दिया कि मैं अपना एक खेत जिसमें अब तीन हेलीकॉप्टर एक साथ आ सकते हैं, देने को तैयार हूं- जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति

Thursday, 9 January 2025

Electro Homeopathy to Become the Catalyst for Health Revolution in Kashmir: Dr. Ajay Hardia's Vision

Recently, Dr. Ajay Hardia, Director of Devi Ahilya Cancer Hospital in Indore, and CEO Mrs. Manisha Sharma visited Kashmir. This visit not only showcased the natural beauty and historical significance of Kashmir but also focused on discussions related to significant developments in the field of Electro Homeopathy. Dr. Hardia has plans to explore a new medical possibility by integrating herbal medicine and Electro Homeopathy in Kashmir.

Kashmir: The Heaven of Herbal Medicine

The climate of Kashmir, especially in winters, is extremely pure and clean. This region is rich in natural herbal plants and medicines, which are crucial for medical treatments. Dr. Hardia and his team believe that studying and researching the herbal plants in Kashmir could not only benefit these traditional medical practices but could also prove useful in Electro Homeopathy. Due to the diverse climatic conditions of Kashmir, the medicinal herbs here possess unique properties that can be utilized in solving various health-related issues.

Dialogue and Collaboration with Local Doctors

The reputation of Electro Homeopathy in Kashmir is steadily increasing. Many local practitioners are using this method to treat patients and promoting its benefits. In this context, Dr. Hardia met with the doctors of Kashmir to exchange experiences. His goal was to strengthen this method in Kashmir and raise awareness about it.

During these meetings, Dr. Muzaffar Rather, who has made significant contributions to the spread of health education in Kashmir, played an important role. Dr. Rather has been awarded the Dr. N.L. Sinha Award for his efforts in health education. His cooperation proved crucial in guiding this initiative. Several doctors from different regions of Kashmir, including Dr. Muhammad Ayub War, Dr. Bashir Ahmed Rather, Dr. Abdul Rashid Dar, Dr. Syed Liaqat, Dr. Abdul Qayoom Machalo, Dr. Javid Ahmed, Dr. Sajad Ahmed, and others, participated in the discussions.

Electro Homeopathy: A Revolutionary Method

Electro Homeopathy is a unique medical system that focuses not on the symptoms of diseases but on their root causes. It uses energy-based medicines derived from 115 medicinal plants to purify the body’s blood and lymph. The aim of this method is to remove toxins from the body and restore overall health. According to Dr. Hardia, it provides relief both physically and mentally. In Kashmir, this method is being effectively adopted, and local doctors are seeing positive results.

Future Possibilities

Dr. Hardia's initiative is seen as a step toward a significant transformation. The combination of Kashmir’s herbal plants and Electro Homeopathy could lead to the development of new medical techniques, which could bring revolutionary changes in the healthcare sector, not only in Kashmir but across India.

This visit has made it clear that with proper research and development, the field of Electro Homeopathy in Kashmir could open new avenues, not only locally but internationally as well. Kashmir could start a new chapter in Electro Homeopathy medicine, and with the contribution of dedicated professionals like Dr. Hardiya, Mrs. Manisha Sharma, and Dr. Muzaffar Rather, this vision is becoming a reality.

Such efforts will not only promote innovation in the field of medicine but also raise awareness about health in society. In the future, Kashmir could become a major hub for herbal medicine and Electro Homeopathy, providing new treatment options for both India and the world.

Discussions on Health Sector Changes: A 3-Hour Meeting

Dr. Hardia held several important meetings in Kashmir regarding Electro Homeopathy, where he engaged in detailed discussions with local doctors for 3 to 4 hours. He was informed that many doctors in Kashmir are eager to have a branch of Devi Ahilya Cancer Hospital established in the region. This would provide local patients with access to high-quality medical services and solutions to their health issues.

Dr. Hardia also highlighted that Kashmiri doctors possess significant experience and knowledge in herbal medicine, especially regarding the region’s rich herbal plants. He acknowledged that these doctors are not only highly skilled but are also keen to enhance their expertise and work under guidance.

Dr. Hardia believes that if work is done in the right direction, the combination of Electro Homeopathy and herbal medicine in Kashmir could bring about a new revolution in healthcare.

This initiative aims not only to strengthen the health sector in Kashmir but also to convey the message that dedication, knowledge, and collaboration can overcome any challenge. Dr. Hardia’s experiences prove that when local doctors and experts collaborate, new milestones can be set in the medical field, and public awareness about health can be increased. This step toward a new medical revolution in Kashmir serves as an inspiring example of how teamwork and dedication can bring about significant change.

कश्मीर में स्वास्थ्य क्रांति का सूत्रधार बनेगा इलेक्ट्रो होम्योपैथी: डॉ. अजय हार्डिया का विज़न

हाल ही में देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल, इंदौर के निदेशक, डॉ. अजय हार्डिया और मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती मनीषा शर्मा कश्मीर के दौरे पर गए थे। उनका यह दौरा न केवल कश्मीर की प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है, बल्कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में महत्वपूर्ण विकास कार्यों पर विचार-विमर्श करना था। डॉ. हार्डिया ने कश्मीर में हर्बल चिकित्सा और इलेक्ट्रो होम्योपैथी के सम्मिलन से एक नई चिकित्सकीय संभावना को तलाशने की योजना बनाई है।

कश्मीर: हर्बल चिकित्सा का स्वर्ग

कश्मीर का मौसम, खासकर सर्दियों में, अत्यंत शुद्ध और स्वच्छ होता है। यह क्षेत्र प्राकृतिक हर्बल पौधों और औषधियों से समृद्ध है, जो चिकित्सा के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। डॉ. हार्डिया और उनकी टीम का मानना है कि कश्मीर में हर्बल पौधों का अध्ययन और शोध न इस चिकित्सा पद्धतियों के लिए वरदान साबित हो सकता है, बल्कि इलेक्ट्रो होम्योपैथी में भी उपयोगी सिद्ध हो सकता है। कश्मीर में विविध जलवायु परिस्थितियों के कारण यहां की औषधियाँ और हर्बल पौधे अद्वितीय गुणों से भरपूर होते हैं, जिनका इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान में किया जा सकता है।

चिकित्सकों के साथ संवाद और सहयोग

कश्मीर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति की प्रतिष्ठा लगातार बढ़ रही है। यहां के कई चिकित्सक इस पद्धति से इलाज कर रहे हैं और लोगों के बीच इसके लाभों को बढ़ावा दे रहे हैं। इस संदर्भ में, डॉ. अजय हार्डिया ने कश्मीर के चिकित्सकों से मुलाकात की और उनके अनुभवों का आदान-प्रदान किया। डॉ. हार्डिया का यह प्रयास कश्मीर में इस पद्धति को और सुदृढ़ बनाने और उसके बारे में जागरूकता फैलाने का था।

इस बैठक में डॉ. मुज़फ्फर राथेर, जिनका नाम कश्मीर में स्वास्थ्य शिक्षा के प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए लिया जाता है, एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे थे। डॉ. राथेर को समाज में स्वास्थ्य शिक्षा के प्रसार के लिए डॉ. एनएल सिन्हा अवार्ड से नवाजा जा चुका है। उनका सहयोग इस पहल को एक नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हुआ। इस दौरान कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों के चिकित्सक, जिनमें डॉ. मुहम्मद आयूब वार, डॉ. बशीर अहमद राथेर, डॉ. अब्दुल राशिद दर, डॉ. सैयद लियाकत, डॉ. अब्दुल कयूम मचलो, डॉ. जाविद अहमद, डॉ. सजाद अहमद आदि लोग शामिल रहे।

इलेक्ट्रो होम्योपैथी: एक क्रांतिकारी पद्धति

इलेक्ट्रो होम्योपैथी एक अद्वितीय चिकित्सा पद्धति है, जो रोग के लक्षणों के बजाय उसके मूल कारणों पर ध्यान केंद्रित करती है। यह 115 औषधीय पौधों से बनी ऊर्जा आधारित दवाओं के माध्यम से शरीर के रक्त (Blood) और लसीका (Lymph)  को शुद्ध करती है। इस पद्धति का उद्देश्य दूषित पदार्थों को शरीर से निकालकर संपूर्ण स्वास्थ्य को पुनर्स्थापित करना है। डॉ. अजय हार्डिया के अनुसार, यह शारीरिक और मानसिक दोनों ही स्तर पर राहत प्रदान करती है। कश्मीर में इसे प्रभावी रूप से अपनाया जा रहा है, जहां के चिकित्सक इसके सकारात्मक परिणाम देख रहे हैं।  

भविष्य की संभावनाएँ

डॉ. हार्डिया के इस पहल को एक बड़े परिवर्तन की दिशा में देखा जा रहा है। कश्मीर के हर्बल पौधों और इलेक्ट्रो होम्योपैथी के संयोग से भविष्य में कई नई चिकित्सा तकनीकें विकसित हो सकती हैं, जो न केवल कश्मीर बल्कि समूचे भारत में स्वास्थ्य क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती हैं।

इस यात्रा ने यह स्पष्ट किया है कि अगर सही दिशा में शोध और विकास किया जाए, तो कश्मीर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के क्षेत्र में न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई राहें खोली जा सकती हैं।

कश्मीर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी चिकित्सा के लिए एक नया अध्याय शुरू हो सकता है, और यह डॉ. अजय हार्डिया, श्रीमती मनीषा शर्मा, डॉ. मुज़फ्फर राथेर जैसे समर्पित चिकित्सकों के योगदान से संभव हो पा रहा है। इस तरह के प्रयास न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देंगे, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी फैलाएंगे। आने वाले समय में कश्मीर हर्बल चिकित्सा और इलेक्ट्रो होम्योपैथी के लिए एक प्रमुख केंद्र बन सकता है, जो सम्पूर्ण भारत और विश्व को नए उपचार विकल्प प्रदान करेगा। 

3 घंटे की बैठक में स्वास्थ्य क्षेत्र में बदलाव पर चर्चा

डॉ. अजय हार्डिया ने कश्मीर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की, जिनमें कश्मीर के स्थानीय चिकित्सकों के साथ 3 से 4 घंटे तक विस्तृत चर्चाएं हुईं। उन्होंने बताया कि कश्मीर के चिकित्सकों की यह गहरी इच्छा है कि देवी अहिल्या कैंसर हॉस्पिटल की शाखा कश्मीर में स्थापित की जाए, जिससे स्थानीय मरीजों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएं मिल सकें और उनकी स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान किया जा सके। डॉ. हार्डिया ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कश्मीर के चिकित्सक हर्बल चिकित्सा के क्षेत्र में पर्याप्त अनुभव और ज्ञान रखते हैं, विशेष रूप से कश्मीर की समृद्ध हर्बल प्लांट्स के बारे में उनकी गहरी जानकारी है। 

उन्होंने यह महसूस किया कि कश्मीर के चिकित्सक न केवल अत्यधिक योग्य हैं, बल्कि वे अपनी क्षमता को और बढ़ाने के लिए तत्पर हैं और हमारे मार्गदर्शन में काम करने के लिए उत्सुक हैं। डॉ. हार्डिया का कहना है कि यदि सही दिशा में कार्य किया जाए, तो कश्मीर में इलेक्ट्रो होम्योपैथी और हर्बल चिकित्सा के इस संयोजन से एक नई क्रांति आ सकती है। 

इस पहल का उद्देश्य केवल कश्मीर के स्वास्थ्य क्षेत्र को सुदृढ़ बनाना नहीं है, बल्कि यह संदेश भी देना है कि समर्पण, ज्ञान, और सहयोग के माध्यम से हम किसी भी चुनौती को पार कर सकते हैं। डॉ. हार्डिया ने अपने अनुभवों से यह सिद्ध कर दिया कि जब स्थानीय चिकित्सक और विशेषज्ञ मिलकर काम करते हैं, तो न केवल चिकित्सा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं, बल्कि समाज में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई जा सकती है। कश्मीर में एक नई चिकित्सा क्रांति की दिशा में यह कदम प्रेरणादायक है और एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है कि कैसे टीमवर्क और समर्पण से बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं। 

इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को मान्यता देने के लिए डॉ. हार्डिया ने प्रधानमंत्री को लिखा खुला खत

प्रति, श्री नरेंद्र मोदी जी, माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली विषय: इलेक्ट्रो-होम्योपैथी को औपचारिक रूप से मान्यता देने की अपील...